एक चिड़िया माँ की कहानी ओर उसके छोटे बच्चे

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 एक गाँव था। जिसका नाम सुराहा था। उस गाँव मे एक नहर वहती थी और आज भी वहती हैं। 

उसनहर के किनारे एक बड़ा सा नीम का पेड़ है ,जिस पर एक चिड़िया ने अपना घोंसला रख-रखा था। 

घोंसलानीम के सबसे नीचे वाली डाल में रख-रखा था। कुछ दिनों बाद उस चिड़िया के बहुत  प्यारे और सुन्दर तीन बच्चे हुए। 

वहबहुत खुश रहती थी।एक दिन वह चिड़िया अपने  बच्चों के लिए

खाना ढूढने के लिए सुबहा निकली उस सुबहा बहुत बारीश और तुफानआया हुुआ था।

वह माँ बिलकुल नही घबराई और निकल पडी़ अपने बच्चों के लिए उनको भूखा नही रखना हैं।

उस माँँ ने पूरेे दिन उस तुुुफान और वारीश का जमकर सामना किया ,पर उसको  अपने बच्चों के  लिए कुछ नहीं मिला। 

उसबेचारी माँ ने बहुत कोशिश की फिर भी कुछ नही मिला। बेचारी उदास होकर एक पेेेड़ पर बैठ गई।

तभी उसकी  नज़र एक खेेेत पर पढ़ती है। वह खेत एक किसान का होता है ,

जो बहुत कनजूस और निर्दयी था। वह माँ अपनेे बच्चों के लिए उस खेत मे चली गई।

जैसे ही वह खेत मे दाना खाने लगी थी। उसने कुछ ही दाने खाए थेे, कि किसान ने उसको पकड़ लिया और

बोला ” तुने ही मेरा खेत खराब किया हैंं ” ,आज 

तुझको राजा के पास ले जाऊगा।वह बोली किसान भईया मेेने कछ नही किया है। मुझको छोड़ दो।

मेरेतीन  छोटे-छोटे बच्चेंं हैं। वो मर जाएगे,अगर मैैं आज समय पर नही पहुँँची तो, वारिश भी बहुत हो रही थी। 

कही मेरे बच्चेंं वह न जाए। नहर का भी पानी बहुत तेजी से उपर आ-रहा हैैं।किसान ने उस 

माँँकी एक न सुनी और उस चिड़िया को राजा के पास ले गया। किसान ने बताया की 

राजा साहव इस चिड़िया ने मेरा पूूूरा खेत खराब कर दिया हैंं, इसको सजा दो। फिर राजा चिड़िया से पूछा किया यह सच है। 

चिड़ियाबोलती है , नही ये सब झूूूठ है।मैंं तो आज ही इनके खेत मे गई थी।

राजा साहब मुझको छोड़ दो।मेरे तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं,जिनका बचना आज बहुत मुुुसकिल है।

आज वारिश बहुत हो रही है, मुझको डर हैै कही नहर पूरी भर न गई हो और मेरे बच्चों  को कुुुछ हो  ना गया हो।

राजा ने जब ये सब सुना तो वह बहुत दुःखी हुआ और फिर उसने कहा छोड़ इस चिड़िया को बरना तुझको फासी पर चढ़बा दूगा।

तुझको उसकी आखो मे ममता नही दिखी बेचारी कितना रो रही है और तड़प रही हैं

अपने बच्चों के लिए। तभी वह किसान उस चिड़िया को छोड़ देता है।

तभीवह चू-चू-चू करके  अपने बच्चों के पास पहुचती है ,तो वहा कुछ नहीं मिलता है ,

सब वह जाता हैंं। वहा पर कुछ नजर नही आता ,न घोसला ,न नीम की डाल ,न 

उसकेेबच्चे सिवाए पानी के।बेचारी चिड़िया माँँ बहुत रोती हैैंं। 

2 Replies to “एक चिड़िया माँ की कहानी ओर उसके छोटे बच्चे”

  1. Surender says:

    Emotional story hai

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