लालच बहुत ज्यादा बुरी बला हैंं

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देवों के देव महादेव का एक मदिंर था। जहा पर हर सावन के महीनें  में  देवों के देव महादेव की पुजा होती थी । कथा भी सुनाई जाती थी और आज भी यह सब होता है।यह मदिंर एक कुलपहाड़ नाम के गाँव में था। मदिंर से थोड़ा दुर चल कर एक घर था।उस घर में एक पति और पत्नी दो लोग रहते थे। उसका पति हर रोज  मदिंर में देवों के देव महादेव की पुजा करके और कथा सुनकर आता था लेकिन परसाद नहीं चढ़ाता था। एक दिन यह बात उसकी पत्नी को किसी ने बता दी। जो उसके घर के अगल बगल में रहते थे।उसको यह सुनकर बहुत ज्यादा बुरा लगा। फिर उसकी पत्नी ने अगले दिन अपने पति से बोला “आ जी सुनते हो आप हर रोज सुबह मदिंर जाते हो वहा पर पुजा भी करते हो और वहा बैठकर कथा भी सुनते हो” लेकिन परसाद नहीं चढ़ाते हो। उसका पति बोलता है हा। क्योंकि वह बहुत ज्यादा कंजूस था। तभी उसकी पत्नी बोलती है ,आप ऐसा मत किया करो ,जब आप मदिंर जाते हो तो एक नारियल भी ले जाया करो लेकिन खाली हाथ मत जाया करो।ईतनी बात सुनकर उसका पति मन ही मन में सोचने लगता है”बात तो सही बोल रही हैं मेरी पत्नी कल से रोजाना मैं एक नारियल  मदिंर में चढ़ा दिया करूगाँ।अब वह कल  दोबारा सुबह मदिंर जाता हैं।इस बार वह दूसरे रास्ते से मदिंर जाता हैं। उस रास्ते में एक जंगल पढ़ता था। वह वही से जाता हैं।चलते-चलते रास्ते में एक नारियल का पेड़ दिखता है, जो कि काफी उचा था। वह मन-ही-मन सोचता है  क्यों ना यही से नारियल तोड़ लेता हूँ ,मेरे पैसे भी बच जाऐगे।      अब वह उस नारियल के पेड़ में तो चढ़ गया। लेकिन अब उससे नारियल न टूटे उसने बहुत कोशिश की लेकिन उससे कुछ भी नहीं हुआ। अब उसको गुस्सा आने लगा।उसने नारियल को जोर से खिचना सुरू कर दिया, तभी उसके दोनों पेर खुल गए और वह नारियल को पकड़ कर लटक गया।फिर जैसे ही उसने नीचे देखा तो उसको अपनी नानी याद आने लगी और वह चिल्लाने लगा “बचायो मुझको मैं मर जाऊगा ,अगर मैं यहा से गिरा तो, अरे दादा!अरे भईया!अरे चाचा!अरे माई!कोई तो बचा लो मुझको ,मैं मरना नही चाहता हूँ। कोई मेरी मदत करो,तभी उसी समय वहा से एक हाथी वाला गुजर रहा था, तो उसने सुना की कोई चिल्ला रहा है।तभी हाथी वाले ने दाए-बाए  और आगे-पिछे देखा पर कोई नहीं दिखा। तभी  एक अवाज़ सुनता है, कि औ हाथी वाले भईया मेरी मदत करो मैं यहा नारियल के पेड़ मे लटका हूँ।तभी हाथी वाला उसको देखता है,और पूछता है,”अरे! वहा आप कैसे पहुच गए भाई सांंहब,फिर वह बोलता है।आप पहले मुझको नीचे तो उतारो फिर सब बताता हूँ।अगर आप मुझको इस नारियल के पेड़ से निचे उतारते हो,तो मैं तुम्हे दस हजार रुपये दूगा। अब हाथीवाले को आगया लालच।उसने मन-ही-मन सोचा “य सही है,आज मैं दस हजार रुपए कमा लूगा “।हाथीवाला बोलता है ठीक है भाई मैं अभी अपने हाथी को पेड़ के नीचे लगा देता हूँ। फिर मैं हाथी के उपर खड़ा होकर तुम्हारे पेर पकड़ लूगा।आप अराम से नीचे उतर आना।वह बोलता है ठीक है।जैसे ही हाथीवाले ने हाथी को नारियल के पेड़ के नीचें खड़ा किया और उसके ऊपर चढ़ कर बोला लो मेरे ऊपर आप अपने पेर रख लो,तभी किया हुआ कि, हाथी की नज़र एक केले के पेड़ पर पड़ी।अब हाथी के मन में भी आगया लालच और हाथी ने मन में सोचा “आज तो मजा आगया ईतने सारे केले पेट भर कर खाऊगा,मेरा मालीक बहुत कम खाने को देता है।अब हाथी वहा से केले के पेड़ की तरफ चल पड़ता हैं, और दूसरा लालची भी।पहले वाले के पेर में लटक जाता है।अब वो भी
चिल्लाने लगता है कोई मदत करो मेरी मैं इस लालची आदमी की बातों में आगया था।तभी पहला लालची बोलता है “मैं थक गया हूँ और अब हाथ भी दर्द कर रहे है।तभी दूसरा लालची बोलता है,सुन भाई तू मुझको दस हजार रुपये दे रहा था।मैं तुझको पंदरह हजार दूगा तू हाथ मत छोड़ियो। अब फिर लालच आ गया उसके मन में वह बोलता है ठीक है,तु अपनी जवान से मुकर मत जियो। दूसरा बोलता है नही ऐसा कुछ नहीं होगा।अब कुछ देर तक दोनों लटके रहे तभी वहाँ से एक तांगा वाला निकल पड़ा अब दोनों चिल्लाने लगे “ओ तांगे वाले भईया हमे बचा लो हम दोनों इस नारियल के पेड़ में लटके हुए हैं।तभी उसकी नज़र दोनों पर पड़ती हैं और तांगेवाला अपना तांगा रोकता है।अरे! भाईयो तुम यहा कैसे लटक गए।तभी दोनो बोलते है भाई सब बता देगे पहले नीचे तो उतार।फिर पहला लालची बोलता है भाई तू मुझेको नीचे उतार मैं तुझको दस हजार रुपए दूगा। तभी हाथीवाला भी बोलता भाई मैं भी तुझको दस हजार रुपए दूगा अगर तू मुझेको भी निचे उतारता हैं। अब तांगेवाला तो और लालच में आगया।उसने सोचा बीस हजार रुपए बो भी दोनों को नीचे उतारने के ईतना तो मैं एक महीने में भी नहीं कमाता हूँ।तांगावाला तुरन्त तैयार हो जाता हैं और अपने तांगे को नारियल के पेड़ के नीचे लगा देता है।जैसे ही वह अपने तांगे के ऊपर चढ़कर बोलता है लो मेरे ऊपर रखो अपने पेर तभी। घोड़े की नज़र सामने खड़े हाथी पर पड़ती हैं और घोड़ा डर जाता हैं।तभी हाथी एक दम से चिल्लाने लगता है,तो घोड़ा डर के मारे वहा से भाग जाता हैं।अब तीनों ही लालची नारियल के पेड़ में लटक जाते हैं और चिल्लाते रहते है हमे कोई बचाओ पर कोई नहीं आता है।थोड़ी देर बाद जो सबसे पहले लटका हुआ था वह अपने हाथ छोड़ देता है और तीनों पेड़ से गिर जाते हैं।तीनों लालचियों के पेर हाथ टूट जाते हैं और  तीनों वही पड़े रहते है न कोई मदत करने आता है, न ही उनको कोई उठाने आता है।वही तीनों अपना दम तोड़ देते हैं और वही मर जाते हैं।

2 Replies to “लालच बहुत ज्यादा बुरी बला हैंं”

  1. Avesh says:

    Wooo nice hindi poems

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