एक जुट्ठ होकर हर समस्या का हल होता है।

ऐकता

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‌एक राजा था। जिसका नाम वरदान सिंह था।उसने अपना नाम अपने गाँव के नाम पर रख रखा था। वरदान नगर एक बहुत प्यारा गाँव था। बहाँ पर खुब हरयाली थी। चारों तरफ सिर्फ हरा-भरा नज़र आता था। बहाँ के लोग भी बहुत अच्छे थे। बहुत मेहनत करते थे। किसी को निचा नहीं दिखाते थे। सभी को एक समान मानते थे। चाहे वो गरीब हो। या फिर छोटी जात का हो। वरदान नगर में ऐकता थी। बहाँ के लोगों का कहना था। सबकों एक जुट्ठ होकर रहना चाहिए। सभी परेशानियों का हल एक साथ मिलकर निकालना चाहिए।इस गाँव की एक यह भी सोच थी। हर परेशानी का निवार्ण है। हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए। इस गाँव की एक खास बात यह भी थी। गाँव के लोग भाई-चारे से रहते थे। यहाँ पर हर कोई रहता था। जैसे हिन्दू , मुस्लिम , सिख , इसाई सभी एक जुट्ठ होकर रहते थे।

उस गाँव में एक लकड़ियों का व्यापार होता था। जिससे बहाँ पर पैसों की कमी नहीं थी। बहाँ पर बहुत सारे वनों से लकड़ियों को काट कर। उनकों बाहर पहुँचाया जाता था। बहाँ का राजा भी इस व्यापार में मदत करता था। बहुत अच्छा व्यापार चल रहा था। एक दिन तूफान आया। जिससे वनों को बहुत शती पहुँचती हैं। बहुत सारे बृक्ष टूट गए। कुछ महीनों तक गाँव के लोगों ने उन वनों पर ध्यान नहीं दिया। न ही बहाँ पर लकड़ी काटने गए। कुछ दिनों बाद बहाँ की हरयाली लुप्त होने लगी। धीरे-धीरे पानी की कमी होने लगी। एक समय ऐसा भी आया कि बारिश के महीनों में बारिश नहीं हुई।

अब कुछ महीने गुज़र गए। लेकिन बारिश नहीं हुई। गाँव में एक गंगा नामक नदीं भी बहती थी। अब वह भी बारिश न होने के कारण पूरी तरह सुख गई। गाँव के सारे तालाब और कुँऐ भी धीरे-धीरे सुखने लगे। पूरे गाँव में पानी का हा-हा कार मचने लगा। किसी को पानी कहीं नहीं मिल रहा था। सभी गाँव वाले राजा वरदान सिंह के पास गए। राजा साहेब अपने गाँव में ये कैसी बिपदा आगई हैं? इसका हल निकालों राजा साहैब। राजा जी परेशान थे। इस साल बारिश क्यों नहीं हुई? उन्होंने इस परेशानी का हल ढूढना था। तो वह दूसरे गाँव में गए। जो सौ मिल दूर था। उस गाँव में एक महात्मा थे। जिनके पास हर समस्या का निवारण था। उस महात्मा का नाग विष्णु था। राजा जी को बहाँ पहुँचने में पूरे तीन दिन लगे। जब राजा जी बहाँ पहुँचते है। तो महात्मा जी ध्यान में मग्न होते हैं। वह उनकी प्रतिक्षा करते हैं। थोड़ी देर बाद महात्मा जी ध्यान से बाहर आते हैं। वह तुरन्त चहरा देख कर बता देते हैं।

मुझकों पता है। आप यहाँ किस समस्या को लेकर मेरे पास आए हैं। इसलिए परेशान मत हो। मैं आपकी हर समस्या का हल बताता हूँ। राजा जी रोने भी लगते है। यह भी कहते है। अगर आपने मेरी समस्या का हल शिर्घ ही नहीं बताया। तो गाँव के लोग प्यासे मरने लगेगे। मुझसे ये सब नहीं देखा जाएँगा। इसकी जगह मेरी जान ले लो। महात्मा इतना सुनकर तुरन्त उनकी समस्या का हल बताते हैं। महात्मा जी बताते है। आपके गाँव में बारिश इसलिए नहीं हो रही है। क्योंकि आपके जो गाँव के वन है। उन वनों से बृक्षों की कमी हो रही है। जिसकी बज़ह से बहाँ का परियावरण भी प्रदुषित हो गया है।

आपने अपना व्यापार तो अच्छा चलाया था। लेकिन परयावरण का बिल्कुल भी ध्यान नहीं रखा। यह उसी का परिणाम है। राजा जी हाथ जोड़कर बोलते हैं। ” इसक निवारण तो होगा ” आपके पास। हाँ है लेकिन बहुत कठोर हैं। आप कर पाओगे। राजा जी कहते हाँ। आप बताओ तो। महात्मा जी बोलते है। आपको दोबारा जाकर उन वनों को हरा-भरा करना होगा। नए बृक्षों को लगाना होगा। तभी बारिश होगी। राजा जी तुरन्त महात्मा जी के पैर छूकर बापस गाँव आ जाते हैं। तुरन्त गाँव के लोगों को ईकट्ठा करते है। सभी को कहते है। हमें बृक्षों को दोबारा लगा कर। उनकी रखवाली करनी होगी। साथ ही उन वनों को भी और घना करना होगा। जिससे बारिश जल्द से जल्द हो सके। अब पुरा गाँव यह कार्य करने में लग जाता हैं। उन्होंनें नए बृक्ष लगाए। साथ ही उस वन को भी साफ किया। बहाँ पर भी नए बृक्षों को लगाया गया।

यह कार्य पूरे गाँव के लोगों ने कम से कम पाँच महीने तक किया। अब गाँव के हर किसी की आश बारिश पर टिकी थी। बारिश ने भी कुछ ज्यादा समय लिया आने पर। पर बहाँ के लोगों ने हार नहीं मानी। वह सभी मिलकर बृक्षों को लगाते गए। एक दिन उनकी मेहनत रंग लाई। बारिश हुई और पूरा गाँव एक बार फिर से उस बारिश में जूम उठा। कहते है ना अगर दिल में हो सच्ची आशा। तो हर परेशानी आपके सामने हाथ जोड़ लेती हैं। उसी प्रकार गाँव के लोगों ने भी एक साथ मिलकर। उस समस्या को हल किया। अपने राजा जी की सहायता से। अब पूरा गाँव दोबारा व्यापार करने लगा। साथ ही बृक्षों का भी खुब ध्यान रखने लगा।

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