एक छोटी सी कन्या और माँ का विशवास

पछताबा

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एक बार एक व्यक्ति गाँव छोड़ कर शहर जा रहा होता हैं। वह गाँव से इसलिए जा रहा था। 

क्योंकि उसको घर वाले डाट देते हैं। तो रास्ते में एक छोटी सी कन्या मिलती हैं। उससे कहती है।

” आप कहाँ जा रहे हो ” वह बोलता है। मैं अपना सब कुछ छोड़ कर यहा से बहुत दूर जा रहा हूँ।

मुझकों कोई प्यार नहीं करता हैं। वह प्यारी सी कन्या मुस्कुराकर बोलती अच्छा ऐसा भी होता हैं। 

मुझकों पता नहीं था। अच्छा एक बात बताओं मुझकों आप ऐसा करके खुश रहो गे।

वो व्यक्ति सोचता है। यह इतनी छोटी होकर। इतनी समझदारी वाली बाते कैसे कर रही है?

वह फिर बताता है। एक बात बताओं तुम इतनी छोटी होकर इतनी समझदार कैसे हो?

और कहाँ से आइ हो? कहाँ जा रही हो?

इतना सुनकर वह छोटी सी कन्या कहती है। मेरा नाम वेशनवी है।

मैं यही पर रहती हूँ। अब आप अपने बारे में बताओं।

वह व्यक्ति उस कन्या की प्यारी बातें सुनकर बहुत खुश होता है। 

वह अपना नाम बताता है। मेरा नाम आकाश है। मेरे घर वालों ने कल रात को मुझको बहुत डाटा था।

जिसकी वज़ह से मैं अपने परिवार वालों से गुस्सा हूँ। फिर मैंने सोचा कि मैं घर छोड़ कर भाग जाउगा। 

तभीमैं जा ही रहा हूँ। वह छोटी सी कन्या फिर मुस्कुराती है। बोलती है जाओं पर इस रास्ते से मत जाना।

वह बोलता है ठीक है। इतना कहकर वह चली जाती हैं। आकाश सोचता है। 

बड़ी प्यारी बच्ची थी। फिर वह चलने लगता है। चलते-चलते वह रास्ता नहीं बदलता है।

जो उस कन्या ने बताया होता है। वह उसी रास्ते में चलता रहता है।

अब वह रास्ते में यह सोचता रहता है। न तो कही आगे घर मिल रहा है।

न ही मझकों पीछे घर मिला था। समझ नहीं आ रहा है। वह कन्या कहा से आई होगी।

वह सोचता रहता है। थोड़ी दूर बाद उसको एक कुँआ नजर आता है।

वह उस कुँऐ में पानी पीने के लिए देखता है। जैसे ही वह उस कूँए में देखता है।

तभी वहाँ पर बहुत जोर से एक आवाज़ आती हैं। तूने मेरी बात नहीं मानी जा मर अब।

फिर उसी कुँए से एक बहुत बड़ा साँप निकलता है। जिसकों देख कर उसके होस उड़ जाते है।

अब वह सोचता है कहाँँ फस गया। काश उस कन्या की बात मान ली होती।

तो आज इसका भोजन नहीं बन रहा होता। तभी बहाँ पर वह कन्या फिर आ जाती है।

तो वह उससे कहता है। तुम यहा क्या कर रही हो? भाग जाओं यहा से। नहीं तो यह साँप तुमको भी खा लेगा।

कन्या मुस्कुराकर बोलती है। मुझकों कुछ नहीं होगा। तुम बस अपनी आँखे बन्द कर लो।

वह जैसे ही अपनी आँख बन्द करता है। तभी वह कन्या उसकों सुला कर एक पेड़ के नीचे लिटा देती हैं।

जब वह अपनी आँखे खोलता है। तो खुद को लेटा हुआ पाता है। एक पेड़ के नीचे।

वह उठता है और सोचता है कितना खराब सपना था? अब जैसे ही अपने सामने बही कन्या को देखता है।

तो तुरन्त उनके पैरों में गिर जाता है। फिर कहता है माँ मुझकों क्षमा कर दो।

वह कन्या कहती है घर जाओं अपने ये तुम्हारी माँ बुला रही है।

इतना कह कर वह कन्या वहाँ से गायब हो जाती हैं। आकाश दौड़ कर घर जाता हैं।

देखता है उसकी माँ पूजा कर रही होती हैं। वह अपने के पैर छुता है। सारी घटना बताता है।

उसकी माँ बोलती है। बेटा आज तो माता ने बचा लिया हर बार नहीं।

इसलिए गुस्से में आकर कोई गलत कदम मत उठाना कभी।

समझे आकाश। हाँ माँ मैं समझ गया। इसलिए कहते है कभी भी अगर आपको कोई बड़ा डाटे।

तो उसका बुरा मत मानना समझे भाईयों बरना बहुत पछताना पड़ेगा।

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