एक किसान के दो बेटे एक लाया मिट्टी और दूसरा लाया उजाला

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एक किसान होता है,उसके दो बच्चे होते है।दोनों ही बहुत बुध्दिमान होते हैं।

पर वह फिर भी परेशान रहता था,कि आगे चलकर कोई इनका साथ देगा या नहीं।

मेरे बाद इन दोनों का क्या होगा?अभी तो बहुत अच्छे है,पर कही आगे चलकर बुरी संगत में न पड़ जाए।

उस किसान को अपने दोनों बेटों की बहुत चिन्नता सताती थी।अब जैसे-जैसे वो दोनों बेटे बड़े होते गए।

सब सही होता रहा।एक का नाम रमन और दूसरे का नाम नमन था।उनके घर में एक बड़ी बहन थी।

जिसकी शादी कर दी गई थी।जो हर त्यौहार में दोनों भाईयों से मिलने आती रहती थी।

उस किसान का नाम रामू था।उसकी बहुत ज्यादा सम्पती थी।वह चंदन पुर का सबसे रहीस किसान था।

पर उसकों इस बात का कोई घमंड नहीं था और वह अपने गाँव के हर व्यक्ति की मदद करता था।

चाहे कोई अमीर हो या गरीब हो सब को वह एक समान मानता था।गाँव में हर लड़की की शादी में खूब दान करता था।

एक बार वह अपने दोनों बेटों को बुलाता है और दोनों से एक काम करने को कहता है,ताकि वह दोनों का दिमाग परख सके।

जब दोनों आ जाते है ,तो दोनों को एक-एक कार्य बोलता है करने को दोनों डर जाते है।

जब वह यह बोलता है,कि मैं कल मर जाऊगा !और मेरे पास समय बहुत कम है कुछ ऐसा करों।

जिससे मैं गर्व से तुम दोनों की पिड ठोक सकू और स्र्वग में खुशी-खुशी जा सकू।दोनों एक दूसरे का चहरा देखने लगते हैं

और सोचते है,ऐसा क्या किया जाए?जिससे हमारे पिताजी को हम पर गर्व हो और वे फर्क से मर सके।

उनके पिता दोनों को कहते है”मेरे प्यारे पुत्रों जाओं कुछ ऐसा लाओं।जिससे तुम दोनों का कमरा भर जाए।”

दोनों अब पहले तो सोचते रहते है ऐसा किया लाया जाए जिससे मैं अपना कमरा भर सकू।

रमन तो तुरन्त खोज में निकल पड़ता है।वह बाज़ार जा रहा होता है,तो उसको रास्ते में एक आदमी एक गढ़े में मिट्टी भर रहा होता हैं।

वह आधा भर चुका होता हैं।तभी रमन के दिमांग में यह विचार आता है।क्यों न मैं अपना घर मिट्टी से भर दू।

इससे मेरा कमरा भर जाएगा।फिर मेरे पिता मेरी पिठ भी ठोक कर बोलेगे बाह!पुत्र बहुत अच्छे।

वह तुरन्त अपने घर जाता है और पाँच बैल गाड़ी लैकर एक पहाड़ के किनारे जहा पर बहुत सारी मिट्टी पड़ी होती है।

वह सबको तुरन्त बोलता है सब अपनी-अपनी बैल गाड़ी मिट्टी से भर लो और मेरे साथ मेरे घर चलों।

सभी जल्दी-जल्दी बैल गाड़ी में मिट्टी भर लेते है और घर पहुँच जाते है।

उसका पिता हैरान होता है मेरा बेटा क्या करने वाला है?वह अपने कमरें को मिट्टी से पूरा भर देता है।

फिर पिता को बुलाता है,देखों मेंने पूरा कमरा भर दिया पिताजी।उसका पिता उससे खुश तो होता है,

पर वह जो सोचता है बैसा कुछ नहीं होता,तो वह अन्दर से निराश हो जाता हैं।

अब उसके बड़े भाई की बारी आती है,तो वह अपने कमरें में अंधेरा कर लेता है

और कमरें के बीच एक दिया रखता है और अपने पिता को बुला कर आता है देखों मेंने कमरें को भर दिया।

उसके पिता सोचते है क्या कर रहा है बेटे तू बता तो मुझकों?

वह एक दिया सलाई से जब वह उस दिपक कों जलाता है,तो पूरा कमरा उजाले से भर जाता है।

उसके पिता यह देख कर बहुत खुश होते है और उसको तुरन्त गले लगा लेते है।

फिर कहते है “शया बास मेरे बेटे बहुत खुम तुम बहुत समझदार हो।”तुमने अपने पिता का सिर गर्व से उँचा कर दिया।

अब उस किसान को किसी भी बात का डर नहीं था,कि उनके बेटे किसी गलत संगत में नहीं है

और उनको अच्छी परबरीश दी गई है।उसने नमन को बोला अपने अनुज को भी अपने जैसी बुध्दि दो पुत्र।

फिर उस ने सब सच बता दिया।मैंने तुम दोंनों की बुध्दि की परीक्षा ली थी।

तुम्हारा अनुज थोड़ा ना समझ है उसको तुम समझाया करो बेटे और मेरे बाद तुमकों ही यह सब सभालना है। समझे मेरे बेटों।

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