दो भाई और एक भाई बहुत बड़ा लालची

Lalach

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एक बार की बात है।एक छोटा गाँव था और उस गाँव में दो भाई रहते थे।

बड़ा भाई समझदार था,लेकिन छोटा भाई बहुत कम समझदार था।

रतन पूर गाँव में दोनों भाईओं का घर था।दोनों की शादी भी हो गई थी।दोनों के पास एक-एक खेत था।

जिसमें दोनों भाई अलग-अलग खेती करते थे।बड़े भाई का नाम करन था और छोटे भाई का नाम अरजून था।

जब दोनों भाई खेती करते थे, तो बड़े की खेती की फसल बहुत अच्छी होती थी।लेकिन छोटे की बहुत खराब फसल होती थी।

क्योंकि जो फसल के दानें होते थे,तो बड़ा भाई अच्छे रख लेता था और छोटे बाले को खराब दानें दे देता था।

जिससे उसकी फसल अच्छी न हो।वह अपने छोटे भाई से चिड़ता था और नहीं चाहता था,

कि यह मेरी तरह बड़ा पैसे बाला बन जाए।इसलिए बड़ा भाई अपने छोटे भाई के साथ भेद-भाव करता था।

 

एक दिन अरजून ने सोचा मैं भी अपने बड़े भाई की तरह मेंहनत करता हूँ।पर मेरी फसल फिर भी खराब हो जाती है।

ऐसा क्यों होता है मेरे साथ?तो उसने एक रात अपने खेत में रूकने का निर्णय लिया और

मन में ठान लिया अगर कोई गाँव का उसकी फसल खराब कर रहा होगा।तो वह उसको नही छोड़ेगा।

क्योंकि उसको अपने बड़े भाई पर पूरा विशवास था,कि उसका बड़ा भाई उससे बहुत प्यार करता है।

इसलिए वह कभी अपने बड़े भाई पर शक नहीं करता था।अब अरजून रात को अपने खेत में देखने गया,

कि कौन उसकी फसल खराब करता है?बहुत देर हो गई कोई नहीं दिख रहा था।

अचानक से अरजून ने देखा। एक बहुत बड़ा हाथी आसमान से निचें आ रहा था।

वह हाथी भगवान इन्र्द का बाहन था।वह तो देख कर डर गया इतना बड़ा हाथी है।

हाथी निचें उतर कर तुरन्त उसके खेत की फसल खाने लगा।अब अरजून को आ गई गुस्सा उसने उस हाथी को भगाना शुरू कर दिया।

वह हाथी तुरन्त उड़ने लगा।अरजून ने उसकी पूँछ पकड़ ली और

उसकी पूँछ पर लटक गया।थोड़ी देर बाद वह उस हाथी के साथ इन्र्द लौक पहुँच गया।

वहाँ इन्र्द देव होते है।जो बोलते है क्या हुआ?कैसे यहाँ आना हुआ तुम्हारा?

वह तुरन्त बोलता है।यह तुम्हारा हाथी हर रोज मेरी फसल खराब कर देता हैं।

जिससे मेरी फसल आज तक अच्छी नहीं हुई है।मुझकों इसका भुकतान चाहिए

नहीं तो मैं आपके हाथी को अगली बार छोड़ूगा नहीं बहुत मारूगा बता रहा हूँ।अब इन्र्द भगवान हस पड़ते है और

उसको हिरों का भरा हुआ एक थैला देते है।फिर कहते है जा और अब तेरा सारा जीवन बहुत खुशी से कटेगा।

फिर अरजून झट से थैला उठा लेता है और कहता है मुझकों बही भिजवा दो जहाँ से मैं आया हूँ।

इन्र्द भगवान एक चुटकी से उसको बही भेज देते है जहाँ से उसने हाथी को भगाया था।

 

अब सुबह होती हैं।अरजून घर पहुँचता है और अपनी पत्नी को बोलता है कल रात मुझकों यह थैला मिला था ।

देख तो इसमें क्या कुछ खाने को है क्या?

उसकी पत्नी भी तोड़ी कम दिमांग की होती हैं,तो जब वह उस थैले में उन हिरों को देखती है।थोड़ी देर तक वह देखती है

और फिर बोलती है।इसमें तो चावल है।अरजून भी खुश हो जाता है और कहता है।

चलो फिर बना लो चावल मजा आ जाएगा।उसकी पत्नी झट से उन हिरों को एक कड़ाई में चढ़ा देती है

और सुबह से दोपहर हो जाती हैं।लेकिन वह हिरें होते है जो कभी चावल नहीं बन सखते है।

उसकी पत्नी जितनी बार उनको देखती की पके या नहीं तो वह बहुत कठोर होते है।जो कि बिल्कुल नहीं पकते है,

तो उसको बहुत गुस्सा आ जाता हैं।वह पूरी कड़ाई उठा कर अपने बगीचे में फेक देती है।

थोड़ी देर बाद जब उसका पती अरजून आता है,तो उनसे बोलती है आप कैसे चावल लाए थे?

वो तो पके ही नहीं और मेने उनको बाहर फैक दिया।सुबह से पका रही थी,

तो नही पके इसलिए मेंने फैक दिए बस अरजून कुछ नही कहता है और दुबारा खेत चला जाता हैं।

 

अब कुछ देर बाद अरजून की भाभी बहाँ से गुजरती है।तो वह देखती है इतने सारे हिरें मेरे दैवर के पास कहा से आए।

लगता है ये दोनों कुछ और कर रहे है।तभी तो हिरें फैक दिए है।

वह सभी हिरों को उठा कर घर ले जाती है और अपने पती को कहती हैं।

ये दोनों हमसे भी ज्यादा अमीर हो गए है।तभी तो हिरों को घर के बाहर फैक रखे थे।

वह करन से बोलती हैं अपने भाई अरजून से पूछों शायद हम भी और अमीर हो जाए।

तभी करन तुरन्त अरजून के घर जाता हैं और अरजून से सब पता करता है।

तो दोनों करन और उसकी पतनी लालच में आ जाते है।तो करन बोलता है हम आज रात को फिर

से चलेगे और तुम्हारी पूरी फसल का भुकतान करना है।अब रात होती हैं।

सब बहाँ पहुँच जाते है और हाथी के आने की राह देखते है।थोड़ी देर बाद हाथी आता है

तो चारों उसकी पूँछ में लटक जाते है।पहले अरजून, फिर उसकी पत्नी,फिर उसका बड़ा भाई करन,

फिर उसकी पत्नी।थोड़ी देर बाद करन अरजून से पूछता है बहा कितने थैले होगे।

तभी अरजून हाथी की पूँछ छोड़ देता है और दोनों हाथों को खोल कर बोलता है।

इतने सारे और चारों के चारों निचे गिरते हैं।कुछ देर तड़पते रहते है फिर मर जाते है।

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