चिड़िया के दुख भरे बोल अपने बच्चों के लिए

एक चिड़ियाँ माँ के बोल

जब उसको एक किसान पकड़ लेता है और राजा के पास ले जाता हैं।

तो वह कई लोगों से बोलती हैं मुझको इस निर्दय किसान से छूड़बा दो।

नहीं तो मेरे बच्चे उस नदीं के पानी में बह जाएगे। उनको बचाने के लिए छूड़बा दो।

ये बहुत ही दर्द भरे थे। कहानी पूरी पढ़ने के लिए पहले

ये कविता पढ़े फिर निचे लिन्क है।

उसको किलिक करे।

सबसे पहले मिलता है उस चिड़ियाँ को रास्ते में गाय चराने बाला। बो बोलता है उस किसान से।

चिड़िया भी उस गाय चराने बाले से बोलती है।

गाय बाले भईया मैेंने इस निर्दय किसान की फसल के, कुछ दाने खाऐ यह मुझकों पकड़ ले जाए,

अन्डा बच्चा रखे नीम के पेड़ में,

आए नदीं बह जाए चू-चू-चू।

वह गाय बाला बोलता हैं, इसको छोड़ दे मेरी एक गाय लेले। नहीं तो इसके बच्चे मर जाएगे।

किसान  कहता है नहीं मैं इसको राजा जी के पास ले जाउगा।

फिर आगे थोड़ी दूर चलकर एक घोड़े बाला मिलता हैं।तो उससे भी चिड़िया कहती हैं।

घोड़े बाले भईया मैेंने इस निर्दय किसान की फसल के, कुछ दाने खाऐ यह मुझकों पकड़ ले जाए,

अन्डा बच्चा रखे नीम के पेड़ में,

आए नदीं बह जाए चू-चू-चू।

वह बोलता है, भाई  क्यों इसके बच्चे मार रहा हैं। छोड़ दे इसको आज नदीं भी बहुत भरी है।

कही इसके बच्चे मर न जाए। मुझसे तू चाहे एक घोड़ा लेले,लेकिन इसको छोड़ दे।

वह फिर से यहीं बोलता है, नहीं राजा के पास ले जाऊगा।

थोड़ी दूर चलकर आगे एक आदमी अपनी बकरियों को चरा कर आ रहा था। तो चिड़िया बोलती है।

बकरी बाले भईया मैेंने इस निर्दय किसान की फसल के, कुछ दाने खाऐ यह मुझकों पकड़ ले जाए,

अन्डा बच्चा रखे नीम के पेड़ में,

आए नदीं बह जाए चू-चू-चू।

बकरी बाला बोलता है, मेरी एक बकरी लेले और इस चाड़िया को जाने दे। नहीं तो इसके बच्चे मर जाएगे।

किसान फिर से यही बोलता है, मैं इसको राजा के पास ले जाऊगा।

आगे चलकर ऊसको एक आदमी अपने दो हाथी लेकर आ रहा था। उससे भी चिड़िया यही कहती है।

हाथी बाले भईया मैेंने इस निर्दय किसान की फसल के, कुछ दाने खाऐ यह मुझकों पकड़ ले जाए,

अन्डा बच्चा रखे नीम के पेड़ में,

आए नदीं बह जाए चू-चू-चू।

अब हाथी बाला कहता हैं,भाई मेरा एक हाथी लेले पर इस चिड़िया को छोड़ दे।

वह कंनजूस किसान यही कहता है,इसको राजा के पास ले जाऊगा।

अब एक और आदमी मिलता है।जो सैठ होता हैं,वह अपने पैसे गिनता हुआ आ रहा होता हैं।

तो चिड़िया कहती हैं।

सैठ भईया मैेंने इस निर्दय किसान की फसल के, कुछ दाने खाऐ यह मुझकों पकड़ ले जाए,

अन्डा बच्चा रखे नीम के पेड़ में,

आए नदीं बह जाए चू-चू-चू।

वह कहता है,ले मेरे सारे पैसे लेले। इसको छोड़ दे।

वह बोलता है, नहीं राजा के पास ले जाऊगा।

आखिर वह राजा के पास पहुँच जाता है और सब बताता है।फिर चिड़िया कहती है।

राजा साहेब मैेंने इस निर्दय किसान की फसल के, कुछ दाने खाऐ यह मुझकों पकड़ ले जाए,

अन्डा बच्चा रखे नीम के पेड़ में,

आए नदीं बह जाए चू-चू-चू।

राजा तुरन्त बोलता है,छोड़ दे चिड़िया को नहीं,तो तुझको मरबा दूगा।

इसके बच्चे भूखे होगे। वह तुरन्त अपने बच्चों के पास जाती है,तो कुछ नहीं मिलता उसको।

सारे उसके बच्चे और अन्डे सब बह जाते है और चिड़िया बहुत रोती है बहाँ बैठ कर।

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