फलों का गाँव और एक भालू का कहर

एक बार की बात है।एक छोटा सा गाँव था,और उस गाँव में बहुत सारे फलों के पेड़ थे।

वह गाँव फलों के नाम से बहुत ज्यादा मशहूर था।उस गाँव के लोगों को पेड़ों से बहुत लगाव था,

इसलिए गाँव के लोगों ने अपने घर के सामने एक छोटा सा बगीचा बना रखा था।

उस बगीचे पर कुछ फलों के पेड़ भी लगा रखे थे।गाँव के लोग फलों का व्यपार भी करते थे।उनका मानना था,

अपनी मेहनत से कर कुछ करना है।किसी के पास काम नहीं करना। नोकर नहीं बनना।

एसी उस गाँव के लोगों की सोच थी।इसी कारण उस गाँव का नाम फलनगर था।जहाँ सारे फल मिलते थे।

उस गाँव के लोग हर मंगलवार को शहर जाते थे।अपने-अपने फल लेकर।अपनी बैल गाड़ी से सुबहा निकलते थे,

दोपहर में पहुँच जाते थे और शाम को अपना वापस आ जाते थे।

 

पूरा गाँव कपल नगर नामक शहर में अपने फलों को बेचने जाते थे।बहुत अच्छा सब कुछ चल रहा था।

एक दिन उस गाँव भालू आ जाता हैं और लोगों के घरों में घुस जाता है।

पूरे घर का सारा समान बखेर देता है और तोड़-फोड़ भा करता है,पर किसी को मारता नहीं है।

वह भालू शाकाहारी हैता है,इसलिए किसी को कोई नुकसान नहीं पहुँचाता है।

पर उसकी इस हरकत से गाँव वाले बहुत डर जाते है और चाहते है,की इसकों गाँव से कैसे बाहर निकाला जाए?

सब बहुत ज्यादा परेशान थे।क्योंकि वह भालू जिसके भी घर पर घुसता था,

तो सब कुछ तहस-नहस कर देता था।उससे पूरा गाँव छुटकारा पाना चाहता था।

 

अब एक बार वह भालू एक बुढ़ी औरत के घर में घुस जाता है,जो बहुत बिमार होती है।

उसका एक बेटा होता हैं, जो पैसों के लालच में विदेश चला जाता हैं।अपने माँ बाप को छोड़कर

और उनकी कभी खबर तक भी नहीं लेता है।उस दिन उसका पती जंगल गया होता है।

फल लाने और लकड़ियाँ भी।क्योंकि उनका शाम का भोजन मिट्टी के चुहले में बनता था।

साथ ही गोबर के आपलों से भी बनता था।अब उस दिन वह भालू उस घर में घुसा तो गाँव के लोगों को लगा।

आज यह बुढ़िया नहीं बचे गी।एक तो बेसे ही बिमार रहती हैं

और उपर से ये भालू भी घर में घुस गया।हे!भगवान रक्षा करना इस माँ की,जो अपने बच्चे के लिए जी रहीं है।

थोड़ी देर बाद उस घर से चिख निकलती है,कोई बचाओं मुझकों।उसके पड़ोस में एक लड़का रहता था।

बो तुरन्त भाग कर गया। वहाँ पर पहले से ही लोग खड़े थे।पर कोई अन्दर नहीं ज रहा था।

वह लड़का सबकों देखकर दंग रह गया,की कोई मदत नहीं कर रहा हैं।

तभी रनजन इधर-उधर देखता है, तो उसको कुछ उसके मित्र वहाँ से जा रहे होते है।

वह तुरन्त अपने मित्रों को लेकर उस बुढ़ियाँ के घर में घुस जाता है और उस भालू को देखकर डर जाता है।

साथ ही उसके मित्र भी पर वह उस बुढ़ियाँ को अकेला नहीं छोड़ना चाहता था।क्योंकि वचपन से वह उसी के साथ रहा था।

उसकी माँ जन्म देकर उसको छोड़ गई थी।वह उसी के सहारे ही जिता था।

उसने फिर से उस बुढ़ियाँ की तरफ देखा और तुरन्त वहाँ पर पड़ी एक लकड़ी उठा कर आग जलाई और तुरन्त उस भालू से लड़ने लगा।

तभी उसके तीनों मित्रों ने भी ऐसा किया।भालू थोड़ा-थोड़ा डरा और फिर वह बाहर की तरफ भागने लगा।

जैसे वह बाहर निकला,तो गाँव के लोगों ने भी अपना दिमाग चलाया।

सभी लोगों ने एक-एक लाँठी ले रखी थी।जैसे वह भालू बाहर आया।

तुरन्त लोगों ने लाँठी मारना शुरू कर दिया।इससे भालू और डरा वह भागने लगा।

गाँव के लोगों ने उसको गाँव से तो बहुत दूर कर दिया भालू को और उस दिन से वह भालू भी नहीं दिखा गाँव के आस-पास।

 

अब वह बुढ़ियाँ भी ठीक होने लगी थी और रनजन भी उनका बहुत ध्यान रखता था।

उनको सुबाह-शाम अपने हाथों से खाना खिलाता था।उनको कभी-भी उनके बेटे की कमी महसूस होने नहीं देता था।

जब से यह घटना हुई थी।अब वह भी ज्यादा ध्यान रखने लगा था।

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