लोगों का तो काम ही है कुछ न कुछ कहना

एक बार की बात है।गड़कपुर नाम का एक गाँव था।वहाँ एक बहुत गरीब परीवार रहता था।

उस घर में  दादी,उसका एक बड़ा बेटा,उसकी पत्नी और एक उनका छोटा बेटा रहता था।

जो की बहुत खुश रहते थे,वे गरीब जरूर थे,

लेकिन उनका मन पानी की तरह साफ थाऐ।एक दिन किया हुआ कि? दोनों बाप और बेटे जंगल जा रहे होते हैे।

जंगल से लकड़ी लाने के लिए।तो दोनों को रास्ते में एक गधा मिलता है और वह बहाँ पर घास घा रहा होता हैं।

तो उसका बेटा कहता है”पिताजी हम इसको साथ ले चलते है”इसको पाल कर हम काम करबाएगे।

पिता भी सोचता है ठीक कह रहे हो तुम अनुज चलो ले चलते है इसको घर।

दोनों उस गधे को रस्सी से बाध कर जंगल ले जाते है और जंगल से उस पर लकड़ी रख कर लाते है।

गधे को अपने घर के पिछे छोटा एक घर होता है उस में बाध देते है।उसको खाने के लिए घास भी दे देते है।

अब कुछ दिन हो जाते है और घर का खाने-पिने का समान भी खत्म हो जाता हैं।

तो उसकी पत्नी अपनी सास से बताती है।तो उसकी सास अपने रामू बेटे से बोलती है।

बेटा सुनते हो घर का राशन-पानी खत्म हो गया है।जाओं बाज़ार से ले आओं,तो दोनों बाप बेटे तैयार हो जाते हैं।

घर का राशन लाने के लिए साथ ही उस गधे को भी साथ ले लेते है।

अब वह दोनों रास्ते में जा रहे होते है और उनके रास्ते में कई गाँव पड़ते है।तो पहला गाँव पड़ता हैं,

तो दोनों पैदल चल रहे होते है।

गधे को भी साथ लेकर चल रहे होते तो,उस गाँव के लोग कहते है “कैसा समय आ गया है ?

गधे के होते हुए भी दोनों पैदल चल रहे है” दोनों यह बात सुन लेते है।फिर आगे चलकर जब गाँव खत्म हो जाता है,

तो रामू अपने बेटे से कहता है।”तुम इस गधे में बैठ जाऔं चलो” ,तो वह बैठ जाता है।

अब एक और गाँव उनके रास्ते में पड़ता है, तो वहाँ के लोग इनको देखकर बोलते है

“कैसा समय आ गया है?बाप पैदल चल रहा है और बेटा गधे पर बैठ कर आराम कर रहा है”।

अब यह बात अनुज को बुरी लग जाती है,तो वह अपने पिताजी से बोलता है।जब गाँव खत्म हो जाता है,

पिताजी अब आप बैठ जाओं गधे पर।इस बार उसके पिताजी बैठ जाते है।थोड़ी दूर चल कर एक गाँव आता है।

तो वहाँ के लोग कहते है “कैसा समय आ गया है?बाप गधे पर बैठा है।

बेटे को चला रहा है।”यह बात दोनों को बुरी लग जाती है,तो दोनों उस गधे पर बैठते ही नहीं है।

अब बाप बेटे दोनों एक रस्सी से उस गधे को बाध कर एक लकड़ी में लटका कर चलने लगते है।

तो इस बार गाँव बाले उनका खूब मजाक उड़ाते हैं।दोनों बाप बेटे पागल है।बताओं गधे को उठा कर ले जा रहे हैं।

अब दोनों बाप बेटे किसी की नहीं सुनते है और चुप-चाप बजार चले जाते है।

तो हमें इस कहानी से यह शिक्षा मिलती हैं।

यदि हम कोई काम करते है,तो हर कोई,

हमें कुछ न कुछ कहता है,लोगों का काम ही,

है कुछ न कुछ कहना हमें उनके बहकाबें में

कभी नही आना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *