एक मुखिया और उसके चेलों की कहानी

बरदान पुर नाम का एक गाँव था।उस गाँव में चोरी बहुत होती थी, लेकिन बहाँ के चोर एक नम्बर के पागल थे।उनको चोरी करना नहीं आता था।ऐसी एक घटना उस गाँव के चार चोरों के साथ हुई।जब वे रात को चोरी करने आए हुए थे।तीन चोर होते है।एक उनका मुखिया होता है।मुखिया का नाम लालू और उसके तीनों चेलों का नाम रमन,अमन और चमन था।उसने अपने तीनों चेलों से कहा”आज बहुत रात हो गई है,जाओं कुछ ऐसा समान चुरा कर लाना जो बहुत भारी हो उठाने में।अब तीनों चोर एक घर में घुस जाते है और यहाँ वहाँ अपने हाथ मारकर चीजों को छुते है।क्योंकि रात का समय था।उस घर में बहुत अंधेरा होता है।तीन छु-छु कर कोई-न-कोई समान ले आते है।उनकों अंधेरे में जो जादा वजन वाला लगता है उसको वो उठा कर देखते है,और लेकर अपने मुखिया लालू के पास पहुँच जाते है।

 

अब जब उनका मुखिया तीनों से पुछता है,कि क्या-क्या लाए हो चेलों?तब तीनों बोलते है मालिक इस बार बहुत भारी समान हाथ लगा है।उठाते-उठाते कमर दर्द करने लगी है हम तीनों की।अब थोड़ी देर बाद तीनों अपना-अपना चोरी का समान देखते है,तो पहले के थैले में एक बहुत बड़ा पत्थर होता है।दूसरे के बोरे में मिट्टी की ईंटे भरी होती है।अब आखरी बाला अपना बहुत बड़ा टोकरा खोलता है,तो उसमें एक चक्की निकलती है।जिसे आटा पिसा जाता था।यह सब देखकर उनका मुखिया पागल हो जाता है और गुस्से में कहता है।अरे!मूर्खों ये क्या उठा लाए तुम सभी? भारी का मतलब था कोई बरत्न या कोई और भारी वस्तु।अब तीनों कहते है गुरू यह भी तो भारी ही है।लालू बहुत चिल्लाता है फीर शांत हो जाता है।

 

अब वह दुबारा अपने तीनों चेलों को भेजता है और बौलता है इस बार कोई हलकी वस्तु लाना जो खुब लम्बी हो।तीनों फिर से एक-एक घर में घुस जाते है और अंधेरे में एक बहुत बड़ा कपड़ों का ढेर बधा होता है उसको उठा कर देखता है।तो उसको वह हलका लगता है।तो वह उसको लेकर आ जाता है।दूसरा एक बहुत बड़ी साड़ी उठा कर आता है और एक भूसे से बोरी उठा कर आता है।अब सुबाह होती है,तीनों चोर अपना-अपना समान अपने मुखिया को दिखाते है।इस बार तीनों का मुखिया उनका समान देखर बेहोस हो जाता है।तब तीनों हर उपाए अपनाते है अपने मुखिया को होस में लाने के लिए।एक अपने गंधे कपड़े सुघाता है,एक सड़ी प्याज सुघाता है और एक पानी भर कर ऊपर डाल देता है।उनका मुखिया तुरन्त उठ कर बैठ जाता है और तीनों से बोलता है इस बार मैं तुम तीनों के साथ चलूगा।

 

अब उनका मुखिया तीनों को बोलता है तुमकों कोई ऐसी वस्तु उठानी है जो आवाज करती हो और चमकती भी हो। उनका मुखिया अपने तीनों चेलों को एक राजा के कमरें में भेज देता है और कहता है मैं यही पर हूँ तुम तीनों का इन्तज़ार कर रहा हूँ,जाओं चोरी करके आओं।अब वों तीनों चोरी करके जो समान लाते है वह संगीत का होता है।जो बहुत चमक रहा होता है।तीनों चोर समान अपने मुखिया को दिखाते है,तो उनका मुखिया इस बार बहुत खुश होता है।वह बाहर खड़े होकर तीनों सोचते है यह चमक तो रही है क्या इनमें आवाज़ भी आएगे?तो तीनों एक-एक करके उनको बहुत तेज बजा देते है।तभी बहाँ पर सिपाही आ जाते है और चारों को खूब मारते है और चारों को कारागार में बन्द कर देते है।

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